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शुक्रवार, 28 अप्रैल 2017

‘तन्नू’ से राइजिंग स्टार ‘मैथिली ठाकुर’ बनने की दिलचस्प कहानी



राइजिंग स्टार रनर-अप का खिताब जीतने वाली बिहार की बेटी मैथिली ठाकुर के बिहार लौटने की खबर के बाद पूरे बिहार सहित मैथिली के प्रशंसकों में ख़ुशी की लहर दौड़ गयी है. मूल रूप से बिहार के मधुबनी जिले के बेनीपट्टी प्रखंड अंतर्गत पैतृक गांव उड़ेन की रहने वाली मैथिली के परिजन दादा अमरकांत ठाकुर, ध्रुव नारायण ठाकूर, वशिष्ठ नारायण ठाकूर, कमलकांत ठाकुर, अमोदानंद ठाकुर, आनंद ठाकूर, रतीश चौधरी मैथिली के चाचा राकेश ठाकूर सहित ग्रामीणों ने ख़ुशी व्यक्त करते हुए बताया कि मैथिली के गांव लौटने से गांव में उत्सवी माहौल है.




मैथिली के आने की खबर पाते ही मैथिली से मिलने के लिए यहां लगातार लोगों का आना जाना लगा हुआ है. मैथिली के दादा शोभासिंधु ठाकुर उर्फ़ बच्चा ठाकुर ने कहा कि हमें अपनी पोती पर गर्व है. मैथिली पहले अपने परिवार के नाम से जानी जाती थी. लेकिन लोगों के आशीर्वाद से मैथिली ने जो काम किया है उससे हम लोग और मैथिली का गांव मैथिली के नाम से जाना जा रहा है. इससे बड़ी ख़ुशी की बात कुछ नहीं हो सकती है. उन्होंने आगे बताया की मैथिली को संगीत से लगाव बचपन से रहा है. जब वह छोटी थी तो उस समय मैथिली के दादा जी घर पर सुबह शाम रियाज किया करते थे. उसी दौरान मैथिली जो की छोटी सी ‘तन्नू’ थी वह अपने दादा जी के पास आकर बैठ जाती थी. यही से संगीत के प्रति मैथिली की बढ़ती रूचि ने उसे दिल्ली ले जाने पर मजबूर कर दिया.



गांव में संसाधन के अभाव में पिता रमेश ठाकुर मैथिली को लेकर दिल्ली चले गए जहाँ उन्होंने मैथिली को संगीत की शिक्षा दी. साथ ही मैथिली के पिता रमेश ठाकुर ने बताया कि वह दिल्ली में संगीत प्रशिक्षण केंद्र भी चलाते है. गांव से शुरू हुआ मैथिली का सफर ने आज अपना मुकाम हासिल कर लिया है.




इसी संदर्भ में मैथिली ने बताया कि मुझे अभी भी याद है कि मैं कुछ दिन पहले तक ‘तन्नू’ थी. मैं जब दादा जी और पिता जी के साथ रियाज पर बैठती थी तो उस समय तक मैं ‘तन्नू’ नाम से बुलाई जाती थी. लेकिन अचानक लोगों के प्यार ने पलक झपकते हमें ‘तन्नू’ से ‘मैथिली ठाकुर’ बना दिया. ‘तन्नू’ से ‘मैथिली’ बनाने का पूरा श्रेय उन्होंने अपने सांगीतिक गुरु दादा शोभासिन्धु ठाकुर उर्फ़ बच्चा ठाकुर और पिता रमेश ठाकुर को दिया है. आगे वह बताती है की मैं बिहार की मिथिला क्षेत्र से हूँ. जिसके कारण शुरू से ही मैथिली भाषा से अधिक प्रेम रहा है. जो की मैंने राइजिंग स्टार के दौरान भी मैथिली में लोगों से वोट की अपील की. साथ ही उन्होंने कहा कि मैं बिहार की बेटी होने पर गौरवान्वित महसूस करती हूं. जिस तरह का प्यार हमें यहां के लोगों से मिल रहा है वह अभूतपूर्ण है.



मैथिली ठाकुर की प्रारंभिक संगीत की शिक्षा-दीक्षा अपने दादा श्री बच्चा ठाकुर व पिता रमेश ठाकुर से मिली है. ग्रामीण परिवेश में पली बढ़ी मैथिली वर्तमान में द्वारिका, दिल्ली में परिवार के साथ रहते हुए बाल भवन इंटरनेशनल स्कुल, द्वारिका से पढ़ाई कर रहीं हैं. मैथिली अब तक संगीत के क्षेत्र में राइजिंग स्टार रनर-अप के साथ कई विशिष्ट पुरस्कार प्राप्त कर चुकी है. वह राष्ट्रीय स्तर के सिंगिंग शो इंडियन आइडियल जूनियर-2015, सारेगामापा सहित कई सिंगिंग रियालटी शो में अपनी प्रतिभा का जौहर दिखा चुकी है. साथ ही मैथिली के आवाज में ‘या रब्बा’ नाम के म्यूजिक एल्बम भी हिट हो चूका है.⁠⁠⁠⁠

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